श्री राम (श्रीरामचन्द्र), प्राचीन भारत में अवतरित, भगवान हैं। हिन्दू धर्म में, श्रीराम, श्रीविष्णु के 10 अवतारों में से सातवें हैं। “रामायण” नामक ग्रंथ में भगवान श्रीराम के विषय में पूर्ण जानकारी दी गई है। भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। खास तौर पर उत्तर भारत में श्रीराम बहुत अधिक पूजनीय हैं।
भगवान श्रीराम ईसा पूर्व 5114 में पैदा हुए थे। अगर आज से हिसाब लगाया जाये तो 5114+2016=7130 दिव्या साल पहले भगवान श्रीराम पैदा हुए थे। यह शोध महार्षि वाल्मीकि की रामायण में उल्लेखित उनके जन्म के आधार पर किया गया है. भगवान श्रीराम पर यह शोध वैज्ञानिक संस्था “आई” ने किया है।
भगवान श्रीराम जी का जन्म अयोध्या के राजा के घर में हुआ था। उनकी माता का नाम कौशल्या और पिता का नाम दशरथ था। भगवान राम के तीन भाई थे:- भरत, शत्रुघ्न और लक्ष्मण। भगवान श्रीराम जी के गुरु का नाम वशिष्ठ था। उनका विवाह माता सीता के साथ हुआ था।
भगवान श्रीराम की कथा
भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम भी कहा जाता है। श्रीराम ने मर्यादा के पालन के लिए राज्य, मित्र, माता पिता, यहाँ तक की पत्नी का भी साथ छोड़ा। इनका परिवार आदर्श भारतीय परिवार का प्रतिनिधित्व करता है। राम रघुकुल में जन्में थे, जिसकी परंपरा प्राण जाए पर वचन ना जाये की थी। पिता दशरथ ने सौतेली माता कैकेयी को वचन दिया था, उसकी 2 इच्छा ( वर) पुरे करने का। कैकेयी ने इन वर के रूप में अपने पुत्र भरत को अयोध्या का राजा और श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास माँगा। पिता के वचन की रक्षा के लिए श्रीराम ने खुशी से 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। पत्नी सीता ने आदर्शपत्नी का उदहारण पेश करते हुए पति के साथ वन जाना पसंद किया। सौतेला भाई लक्ष्मण ने भी भाई का साथ दिया। भरत ने न्याय के लिए माता का आदेश ठुकराया और बड़े भाई श्रीराम के पास वन जाकर उनकी चरणपादुका( चप्पल) ले आए। फिर इसे ही राज गद्दी पर रख कर राजकाज किया। श्रीराम की पत्नी सीता को रावण हरण(चुरा) कर ले गया। श्रीराम ने उस समय की एक जनजाति वानर के लोगो की मदद से सीता को ढूंढा। समुद्र में पुल बना कर रावण के साथ युद्ध किया। उसे मार कर सीता को वापस लाये। जंगल में श्रीराम को हनुमान जैसा दोस्त और भक्त मिला जिसने श्रीराम के सारे कार्य पूरे कराये। श्रीराम के आयोध्या लौटने पर भरत ने राज्य उनको ही सौंप दिया। श्रीराम न्याय प्रिय थे। बहुत अच्छा शासन् किया इसलिए आज भी अच्छे शासन को रामराज्य की उपमा देते हैं। हिन्दू धर्म के कई त्यौंहार, जैसे दशहरा और दीपावली, श्रीराम की जीवन–कथा से जुड़े हुए हैं। रामनवमी का पावन पर्व श्री राम के जन्म उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
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किसी भी मुश्किल परिस्थिति में भगवान राम ने अपना धैर्य नहीं खोया है। उन्होनें हर परेशानी में धैर्य से काम लिया है
रामायण में भगवान श्रीराम को भगवान विष्णु का अवतार बताया गया है जो स्वंय भगवान के गुणों से ओतप्रोत है।
पिता दशरथ और माता कैकेयी के द्वारा 14 वर्ष का वनवास दिए जाने पर श्री राम ने माता-पिता की आज्ञा का पालन किया।
गुरु का स्थान किसी भी व्यक्ति के जीवन में सबसे बड़ा होता है। गुरू के ज्ञान से ही हम जीवन में सफलता प्राप्त कर पाते हैं
नाम श्री राम को अंक है सब साधन हैं सून। अंक गए कछु हाथ नहिं अंक रहे दस गून।।
श्री राम नाम जपि जीहँ जन भए सुकृत सुखसालि। तुलसी इहाँ जो आलसी गयो आज की कालि।।
श्री राम नाम सुमिरत सुजस भाजन भए कुजाति। कुतरुक सुरपुर राजमग लहत भुवन बिख्यति।।
राम लेखन
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श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार । बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार ।।
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